सामुदायिक सहभागिता से ही फाइलेरिया उन्मूलन संभव – डॉ. शशिकांत शम्भरकर, उप-संचालक, सार्वजनिक आरोग्य विभाग, नागपूर संभाग, महाराष्ट्र

- फाइलेरिया उन्मूलन हेतु नागपूर संभाग के तीन जिलों में 10 फरवरी से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम का शुभारंभ
- चंद्रपूर, भंडारा और गढ़चिरौली जिले के 11 ब्लॉक में कुल 15,27,813 लाभार्थियों को फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराया जाएगा
नागपुर, 5 फरवरी 2026 : महाराष्ट्र को फाइलेरिया मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता के तहत मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) राउंड के शुभारंभ से पूर्व आज नागपुर जिले में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के प्रति जनमानस में कार्यक्रम के बारे में मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करना था।
10 फरवरी से नागपूर संभाग के 3 जिलों (चंद्रपूर, भंडारा और गढ़चिरौली) में शुरू होने वाले एमडीए राउंड के सफल क्रियान्वयन हेतु कुल 1527813 लाभार्थियों को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराना अपने ही सुनिश्चित करेंगे।
इस अवसर पर राज्य के उप-निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं, नागपुर संभाग , डॉ. शशिकांत शम्भरकर ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो मच्छरों के काटने से फैलती है और दीर्घकालिक दिव्यांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। यह संक्रमण प्रायः बचपन में होता है, लेकिन इसके लक्षण वयस्क अवस्था में प्रकट होते हैं। उन्होंने बताया कि यह रोग लसीका तंत्र को क्षति पहुंचाता है और समय पर रोकथाम न होने पर शरीर के अंगों में असामान्य सूजन उत्पन्न करता है, जिसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। इससे पीड़ित लोगों को हाइड्रोसील, लिम्फेडेमा एवं दूधिया सफेद मूत्र जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया से बचाव का एकमात्र प्रभावी उपाय फाइलेरिया रोधी दवाओं का वार्षिक सेवन है।
डॉ. शम्भरकर ने बताया कि सामान्यतः इन दवाओं के सेवन से कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होते। कुछ व्यक्तियों में हल्की मितली या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जो यह शुभ संकेत देते हैं कि दवाएं शरीर में मौजूद फाइलेरिया परजीवियों पर प्रभाव डाल रही हैं। उन्होंने बताया कि एल्बेंडाजोल दवा भोजन के बाद चबाकर तथा डीईसी एवं आइवरमेक्टिन को पानी के साथ निगलना आवश्यक है।

सहायक निदेशक (मलेरिया), स्वास्थ्य सेवाएं, नागपुर संभाग डॉ. नयना दुफारे ने जानकारी दी कि 10 फरवरी से नागपूर संभाग के चंद्रपूर, भंडारा और गढ़चिरौली जिलों के चिन्हित 11 ब्लॉक में तीन दवाओं (डीईसी, एल्बेंडाजोल एवं आइवरमेक्टिन) के माध्यम से एमडीए अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्यकर्मी बूथों के माध्यम से एवं घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाएंगे। उन्होंने जानकारी दी कि 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाएगी। दवा खाली पेट नहीं खानी है तथा इसका सेवन आशा कार्यकर्ता या स्वास्थ्यकर्मी के समक्ष ही करना अनिवार्य होगा। उन्होंने यह भी बताया कि ये दवाएं फाइलेरिया के साथ-साथ कृमि संक्रमण, खुजली जैसी समस्याओं को भी समाप्त करने में सहायक होती हैं तथा बच्चों के शारीरिक एवं बौद्धिक विकास में भी मदद करती हैं।
राष्ट्रीय कार्यक्रम अधिकारी, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) डॉ. कमलाकर लशकरे ने कहा कि डब्ल्यूएचओ इस कार्यक्रम की प्रत्येक स्तर पर निगरानी करेगा, ताकि ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में दवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा सके और कोई भी लाभार्थी पीछे न रह जाए।
कार्यशाला में ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज के सीनियर डायरेक्टर अनुज घोष ने मीडिया सहयोगियों से संवाद करते हुए उनसे अपील की, कि वे अपने समाचार पत्रों एवं चैनलों के माध्यम से इस कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार कर जन-जन तक पहुंचाएं और फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें।
| नागपूर संभाग के एम डी ए अभियान के चिन्हित क्षेत्र एवं जनसंख्या | ||
| जिला | ब्लॉक का नाम | ब्लॉककी जनसंख्या |
| भंडारा | तुमसर | 227824 |
| भंडारा | लाखनी | 127204 |
| भंडारा | मोहाड़ी | 154408 |
| चंद्रपुर | ब्रह्मपुरी | 169317 |
| चंद्रपुर | चिमूर | 163677 |
| चंद्रपुर | मुल | 118182 |
| चंद्रपुर | पोंभुर्णा | 49630 |
| चंद्रपुर | राजुरा | 140060 |
| चंद्रपुर | सावली | 106128 |
| गढ़चिरौली | चामोर्शी | 173556 |
| गढ़चिरौली | गढ़चिरौली | 97827 |
| कुल | 1527813 | |

