श्रीराम मंदिर ध्वजारोहण पर पाकिस्तान की बौखलाहट

भारत के सांस्कृतिक उदय से क्यों डर रहा है पाकिस्तान?
भारत की सांस्कृतिक ताकत का उदय — और पाकिस्तान की बढ़ती बेचैनी
अयोध्या में श्रीराम मंदिर के ऐतिहासिक ध्वजारोहण ने पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया। यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और सभ्यतागत पुनर्जागरण का प्रतीकात्मक क्षण था। परंतु इस भव्य और सम्मानजनक आयोजन ने पाकिस्तान को फिर बौखला दिया।
भारत के आंतरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर पाकिस्तान द्वारा आपत्ति उठाना कोई नई बात नहीं है। जैसे ही भारत की शक्ति, प्रतिष्ठा या सांस्कृतिक प्रभाव दुनिया के सामने उभरता है, पाकिस्तान तुरंत निंदा, विरोध और झूठे आरोपों का सिलसिला शुरू कर देता है।
अयोध्या में हुए ध्वजारोहण पर पाकिस्तान की टिप्पणी इसी मानसिक दिवालियापन और पुरानी भारत-विरोधी आदत का नवीन उदाहरण है।
🇵🇰 पाकिस्तान का झूठा आरोप — और कड़वी सच्चाई
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने दावा किया कि अयोध्या में ध्वजारोहण भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर ‘दबाव’ का प्रतीक है।
लेकिन दुनिया जानती है कि किस देश में अल्पसंख्यक वास्तव में खतरे में हैं।
📌 पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की वास्तविक स्थिति
- पाकिस्तान में आज मुश्किल से 50 लाख हिंदू बचे हैं।
- 1947 में जहाँ पश्चिमी पाकिस्तान में 15% हिंदू थे, आज यह संख्या 2% से भी कम है।
- सिख, ईसाई और अहमदिया समुदाय पर लगातार अत्याचार के अनगिनत उदाहरण हैं।
- 2025 की पहली छमाही में, USCIRF की रिपोर्ट में पाकिस्तान को धार्मिक उत्पीड़न का प्रमुख केंद्र बताया गया है।
इसके उलट—
📌 भारत की वास्तविकता
- भारत में 20 करोड़ से अधिक मुस्लिम सुरक्षित, सम्मानजनक और सक्रिय सामाजिक-राजनीतिक भागीदारी के बीच जीवन जीते हैं।
- यहाँ हर धर्म को समान संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं—चाहे वह मंदिर हो, मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारा।
- भारत की विविधता और समभाव की संस्कृति पाकिस्तान की एकरंगी मानसिकता से बिल्कुल विपरीत है।
पाकिस्तान का विरोध—उसके डर की अभिव्यक्ति
भारत आज आर्थिक, सैन्य, कूटनीतिक और सांस्कृतिक सभी क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पाकिस्तान की बेचैनी के मुख्य कारण—
- भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में अद्भुत वृद्धि
- भारतीय संस्कृति व आध्यात्मिक मूल्यों का वैश्विक सम्मान
- अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण—भारत की एकता, आस्था और अस्मिता का प्रतीक
- भारत का 21वीं सदी में स्थिर और निर्णायक शक्ति बनकर उभरना
पाकिस्तान जानता है कि एक आत्मविश्वासी, एकजुट और सांस्कृतिक रूप से संपन्न भारत उसकी कट्टरपंथी राजनीति के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
🌍 अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की नौटंकी
पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र में ‘बुकलेट्स’ जमा करना या भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना उसकी असफल विदेश नीति और राजनीतिक हताशा का प्रमाण है।
दुनिया जानती है कि—
- पाकिस्तान आर्थिक संकट,
- राजनीतिक अस्थिरता,
- और आतंकवाद के दलदल में फंसा हुआ देश है।
ऐसा देश भारत के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करे, यह स्वयं में हास्यास्पद है।
भारत का संयम—और दृढ़ जवाब देने की तैयारी
भारत हमेशा से शांतिपूर्ण कूटनीति, तथ्याधारित जवाब, और संवैधानिक मर्यादा का पालन करता आया है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि भारत किसी भी दखलंदाजी को स्वीकार करेगा।
भारत का संदेश स्पष्ट है—
- हम किसी देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देते।
- और अपने आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त भी नहीं करते।
अयोध्या का मंदिर भारत की सांस्कृतिक आत्मा का हिस्सा है, न कि किसी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय।
🌺 सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अनवरत यात्रा
अयोध्या में श्रीराम मंदिर का ध्वजारोहण भारत की—
- सांस्कृतिक चेतना
- सभ्यता-स्मृति
- आध्यात्मिक एकता
- और राष्ट्रीय गौरव
का जीवंत प्रतीक है।
पाकिस्तान चाहे जितनी भी बौखलाहट दिखाए, भारतीय संस्कृति का उत्थान अविराम है।
भारत आगे बढ़ेगा—
- अपनी सभ्यता को सशक्त करेगा,
- अपनी संस्कृति को विश्व-पटल पर स्थापित करेगा,
- और हर झूठी, उकसाने वाली टिप्पणी का तथ्य और दृढ़ता दोनों से जवाब देगा।
🔵 निष्कर्ष : पाकिस्तान की बौखलाहट = भारत के उदय का प्रमाण
पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया उसकी पराजित मानसिकता और भारत के उभार के डर का परिणाम है।
भारत न केवल तैयार है, बल्कि सक्षम भी है—
हर मोर्चे पर जवाब देने में, साहस से भी, और संस्कार से भी।

